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Showing posts from January, 2022

नमक

  नमक किसी की दादी 25 मील दूर से नहीं आयी ना कोई बेटी बहुत दूर ब्याही गई इसलिए पहाड़ो में बहुत सी भाषाएँ बन गई कुछ शब्द अन्य जगहों से बिलकुल अलग बन गए जरा सोचो ऋषिकेश और हल्द्वानी से नमक लेकर आना अपनी पीठ पर 20-30 दिनों बाद घर पहुँचना शाम को गाँव की औरते घर से हर शाम को निकलती थी उजाले के लिए कुछ छीले लेकर ताकि गाँव के पास नमक लेकर आने वालों का स्वागत किया जा सके इस हालत में अपने आप को जिन्दा रखना और परिवार को जिन्दा रखना कितना मुश्किल रहा होगा हमारा जीन बहुत संघर्ष करके यहाँ तक पहुँचा 12 से 15 बच्चे पैदा करना उसमे से 5 से 6 बच्चों का बच पाना विधाता का खेल माना गया   यह आम बात थी l   जब 4 साल के बच्चे को छोटे भाई बहनों की रखवाली की पहली जिम्मेदारी मिली आज भी मिलती है घर के अन्दर बन्द बचपन अपनी माँ की राह देखता दिनभर छोटी बहन 10 बार रो-रो   कर सो गयी दूसरा 4 बार पेशाब कर चुका है सलवार में   और तुम दो बार कर चुके हो वही कोने पर घर के अन्दर   कभी-कभी जाली से सीधे बाहर ताकि माँ को पता ना च...

समय का अंत

  समय का अंत भोर होगी, ऊँजियारा होगा हवा भी चलेगी, आज बच्चे भी जरूर खेलेंगे लड़ेंगे झगड़ेंगे फिर एक बार सब जोर से हँसेंगे तुम वही होंगे समय का अंत होगा आज फिर बारिश होगी बारिश की बुँदे तुम पर पड़ेगी तुम आसमान में देखोगे फिर कोई आवाज आएगी क्या कर रहे हो बारिश में मत खेलो भीग जाओगे अचानक समय जी उठेगा फिर सब कुछ होगा तुम नहीं होंगे कुछ देर बाद गीली मिट्टी को छूने का मन करेगा मिट्टी में खेलना जी उठेगा फिर कोई आवाज आएगी क्या बच्चों की तरह खेलते हो समय फिर जी उठेगा तुम्हे पुरानी यादे आएँगी तुम यादो में खो जाओगे कुछ देर बाद तुम चल पड़ोगे चलते रहोगे बहुत लोगों के साथ अकेले में डर लगेगा तुम अँधेरे से डरने का बहाना बनाओगे कभी – कभी तुम अकेले रहना पसंद करोगे अब क्या अकेले में फिर आपको दोस्तों की याद आएगी फिर तुम लोगों के पास आओगे कभी कभी तुम अपने आप को समझाओगे कि तुम ठीक चल रहे हो सब लोग भी यही कर रहे है कभी अचानक तुम रुक जाओगे फूलो के पास फिर बारिश होगी बुँदे तुम पर गिरेंगी अब तुम डर जाओगे बूंदों से भीगने से फिर तु...

तुम

  तुम नदियों में बहती हर बूँद तुम हो आती जाती लहर भी तुम हो कई - कई बार तुम समुद्र से मिल चुके हो फिर भी तुम्हारी समुद्र से मिलने की चाहत में तुम ही हो   उठते – गिरते तुफानो में भी तुम ही हो l बादलो में मचलती हर बूद में तुम हो धरती से मिलने को आतुर भी तुम हो   विद्युत की ज्वाला भी तुम हो आती - जाती सांसो के बीच भी तुम हो चंचल में स्थिर तुम हो स्थिर में चंचल भी तुम हो कुछ नहीं में सब कुछ और सब कुछ में कुछ नहीं तुम हो ! जीवन में मृत और मृत में जीवन तुम हो तुम निशब्द हो तुम इशारा हो l सूक्ष्म में तुम हो और विराट भी तुम हो तुम जहाँ भी देख सकते हो हर जगह तुम हो भीतर जो देख रहा है वह तुम हो बाहर जो दिख रहा है वह भी तुम हो भीतर जो सुन रहा है वह तुम हो जो सुनाई दे रहा है वह भी तुम हो तुम तुमसे ही मिलना चाहते हो

हालात

  हालात हालात बड़े नाजुक है फिज़ा को पहचान ले अब तू आराम वक्त ज़ाया न कर तू दिल का हाल जान ले समंदर के बीच लहरों में आया कर किनारों पर वक्त ज़ाया न कर तू हवाओं का रूख पहचान उसमे ठंडक पहचान, गर्मी पहचान मौसम के रंगत को जान कुदरत की बदलती दरख्तों को पहचान आवाज दूँ तो तू उसमे मिज़ाज़ को पहचान तू है कि   मैं हूँ या मैं हूँ कि तू है तू इसमें भेद न जान तू वक्त बदलने के इंतज़ार में अब और वक्त ज़ाया न कर l  

The Time

  The Time Time is nothing It came from nothing Eventually it will go to nothing “The Nothing” is more than time How do you know that? There is a time Past is time Memories are time When you are not aware Then time begins Present is not the time That is you As we are in ignorance of present There is time You can’t feel the time Without travelling in unconsciousness The feeling of time is the feeling of absence Oneness is not time

पसीना पहचान

  पसीना पहचान मेहनत का पसीना आवाज कम करेगा भविष्य के डर का पसीना बीमार करेगा इंसान से पत्थर तुम यू ही नही बन गए हो जमाने की समेटने की आदत से तुम लगभग एक जमाना हो गए हो । तुम तो जानते हो कि तुम कोंन हो बस खुदको छुपाने में आया पसीना छुपा रहे हो । Karan singh