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Showing posts from July, 2021

मिट्टी

 मिट्टी एक त्यौहार है, एकदम रोपड़ी जैसी, जिसमे मिट्टी महकती है, संगीत के साथ इसमे मनुष्यों की धरती पर अभी तक की यात्रा का पूरा विवरण जिंदा है । इसी मिट्टी में लतपत है इतिहास मानव का, जीव -जन्तुओं का, रंग बिरंगी तितलियों का, पेड़ -पौधों का 'मिट्टी इतिहास है'; वहाँ वर्तमान भविष्य चुप-चाप खेत की मेड़ पर एक अहंकारी आसमानी बिजली की तरह चमचमाता साफ सुथरा खड़ा है, मानो कि वह रोटी, दाल- भात सब्जी सब आसमान से प्राप्त करता हो और मिट्टी पर उसकी निर्भरता खत्म हो गई हो, उसने अपनी नाक सिकोड़ी है, भौ उचकाई है । *भविष्य मिट्टी है* इसे आप सभ्य शब्दों में महोत्सव कह सकते हो मिट्टी का मिट्टी के साथ । जिसे कभी-कभी जीवन भी कहते हैं।   Karan singh

अदाएं

  अदाएं अदाएं ऐसी कि तुम्हारा शर्माना अमर हो गया मालूम नहीं कब हमसे जुर्म हो गया   ये अर्जियां , अदालत , दलील और कैद सब कबूल है बस एक बार मुड़कर तुम्हारा मुस्कराना ग़जब हो गया । तुम तो कहती थी कि तुम्हारी बाहों में जन्नत है तो अब क्या कैदखाने को भी इश्क की इबादत गाह बनाकर मानोगी । हकीकत तो हम जानते है   आपकी आँखों की तुम्हारी निगाहों ने कितनी बार कत्ल किया है मेरा चश्मदीद भी तुम ही हो मै गवाह कहाँ से लेकर आऊं अब हम अदालत को क्या बताएं   कैसे बिना हथियारों के   तुम हर रोज कत्ल कर देती हो मासूमों का हर वक्त तुम्हारा जुर्म कोई और कबूल कर लेता है तुम्हारी आंखों में दरिया है सच में मेरा डूबना पक्का है कस्ती समेत हम से बेहतर कोन जानता है   डुबाना तुम्हारा हुनर है   तुम्हारे इस हुनर को मेरा सलाम ! मै आज भी तुम्हारी खुशबू बहुत दूर से पहचान लेता हूं मै कई मर्तबा इत्र लेने बाज़ार जरूर गया लेकिन खाली हाथ लौट आया मेरे तहखाने में आज भी कैद है   तुम्हारा तकिया , रुमाल बैग और कुछ सामान कभी आओ फुरसत में वही...

नमक

  नमक किसी की दादी 25 मील दूर से नहीं आयी ना कोई बेटी बहुत दूर ब्याही गई इसलिए पहाड़ो में बहुत सी भाषाएँ बन गई कुछ शब्द अन्य जगहों से बिलकुल अलग बन गए जरा सोचो ऋषिकेश और हल्द्वानी से नमक लेकर आना अपनी पीठ पर 20-30 दिनों बाद घर पहुँचना शाम को गाँव की औरते घर से हर शाम को निकलती थी उजाले के लिए कुछ छीले लेकर ताकि गाँव के पास नमक लेकर आने वालों का स्वागत किया जा सके इस हालत में अपने आप को जिन्दा रखना और परिवार को जिन्दा रखना कितना मुश्किल रहा होगा हमारा जीन बहुत संघर्ष करके यहाँ तक पहुँचा 12 से 15 बच्चे पैदा करना उसमे से 5 से 6 बच्चों का बच पाना विधाता का खेल माना गया   यह आम बात थी l   जब 4 साल के बच्चे को छोटे भाई बहनों की रखवाली की पहली जिम्मेदारी मिली आज भी मिलती है घर के अन्दर बन्द बचपन अपनी माँ की राह देखता दिनभर छोटी बहन 10 बार रो-रो   कर सो गयी दूसरा 4 बार पेशाब कर चुका है सलवार में   और तुम दो बार कर चुके हो वही कोने पर घर के अन्दर   कभी-कभी जाली से सीधे बाहर ताकि माँ को पता ना च...

समय का अंत

  समय का अंत भोर होगी, ऊँजियारा होगा हवा भी चलेगी, आज बच्चे भी जरूर खेलेंगे लड़ेंगे झगड़ेंगे फिर एक बार सब जोर से हँसेंगे तुम वही होंगे समय का अंत होगा आज फिर बारिश होगी बारिश की बुँदे तुम पर पड़ेगी तुम आसमान में देखोगे फिर कोई आवाज आएगी क्या कर रहे हो बारिश में मत खेलो भीग जाओगे अचानक समय जी उठेगा फिर सब कुछ होगा तुम नहीं होंगे कुछ देर बाद गीली मिट्टी को छूने का मन करेगा मिट्टी में खेलना जी उठेगा फिर कोई आवाज आएगी क्या बच्चों की तरह खेलते हो समय फिर जी उठेगा तुम्हे पुरानी यादे आएँगी तुम यादो में खो जाओगे कुछ देर बाद तुम चल पड़ोगे चलते रहोगे बहुत लोगों के साथ अकेले में डर लगेगा तुम अँधेरे से डरने का बहाना बनाओगे कभी – कभी तुम अकेले रहना पसंद करोगे अब क्या अकेले में फिर आपको दोस्तों की याद आएगी फिर तुम लोगों के पास आओगे कभी कभी तुम अपने आप को समझाओगे कि तुम ठीक चल रहे हो सब लोग भी यही कर रहे है कभी अचानक तुम रुक जाओगे फूलो के पास फिर बारिश होगी बुँदे तुम पर गिरेंगी अब तुम डर जाओगे बूंदों से भीगने से फिर तु...

दीदार

  दीदार पाओं में पायल की खनक ही नहीं जीता जागता गुलिस्ताँ देखो नज़रों की नजर देखो अपनी ही भीतर देखो l जब रास्ते बदलकर भी वही आना है तो मंजिलों की मंजिल भी मत देखो हर बार इस तरह देखो कि देखना ही हो जाओं हाथों से देखों माथे से देखों जहाँ देख रहे हो वहाँ अपने आप को भी देखो l आसमान में देखों बादलों के पार l ऐसे सुनो कि सुनना ही हो जाओ l ऐसे देखो कि देखना ही हो जाओ l   आँखों का क्या वास्ता है देखने से एक बार आँखे बन्द करके देखो l                    Karan Singh 16 Oct 2017

हिसाब

    हिसाब करना है तो जरूर कर हिसाब लगाना ही है तो जरूर लगा थोडा दूर और अपने करीब एक जीरो भी लगा जोड़ना –घटना जो करना है कर गुणा –भाग जो करना है कर मगर तेरा हिसाब हमेशा अधूरा रहेगा तू कभी भी घाटे में नहीं था और तू आज भी घाटे में नहीं है l तेरे अनुभव तेरे काम नहीं आयेंगे इस बात पर अमल कर l तेरे ही अनुभव   तुझे अनुभव हो जाने से रोक रहे है सपनो से महँगा कुछ नहीं बिकता है यहाँ तू मोतियों को लुटाकर रेत खरीद रहा है तू जिसे ज्ञान समझकर सीने से लगाकर रखता है सब मिट्टी है - सब मिट्टी है l हो सके तो अभी अमन (अ मन) में आ मै वही हूँ तेरे साथ समय के पार l l         Karan Singh 6 Feb 2018

खुमारी

  खुमारी बड़ी मदमस्त खुमारी है तेरे इश्क में...... वक्त रुक जाता है या मै ही वक्त हो जाता हूँ l   तुम आज जिसे पागल समझ रहे हो सिर्फ वही तो अपना पागलपन छोड़ सका है l बड़ी मदमस्त खुमारी है ! तेरे इश्क में होश भी है और बेहोशी भी है   बड़ी मदमस्त खुमारी है ! तुम जिसे समझदारी समझ रहे हो ll वह भी तेरी बेहोशी का एक और कारनामा है l पीना है तो एक घूँट   में तर हो जा - बड़ी मदमस्त खुमारी है ! तू जिसकी तलाश में बेहोश है l वह खुद तेरी तलाश में मदहोश है ll इश्क की चासनी में खुरचन की तलाश तुझे भी है प्यास को पीकर आजा और अभी डुबकी लगा l बड़ी मदमस्त खुमारी है ! सावन का इन्तजार अब छोड़ दे ! तू ही सावन है यह भी जान ले l बड़ी मदमस्त खुमारी है – तेरे इश्क में मदहोशी का होश हो गयी - बड़ी मदमस्त खुमारी है – Karan Singh 29 th Jan 2018