हालात
हालात बड़े नाजुक है फिज़ा को
पहचान ले
अब तू आराम वक्त ज़ाया न कर
तू दिल का हाल जान ले
समंदर के बीच लहरों में आया
कर
किनारों पर वक्त ज़ाया न कर
तू हवाओं का रूख पहचान
उसमे ठंडक पहचान, गर्मी
पहचान
मौसम के रंगत को जान
कुदरत की बदलती दरख्तों को
पहचान
आवाज दूँ तो तू उसमे मिज़ाज़
को पहचान
तू है कि मैं हूँ या मैं हूँ कि तू है
तू इसमें भेद न जान
तू वक्त बदलने के इंतज़ार
में
अब और वक्त ज़ाया न कर l
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