तुम
नदियों में बहती हर बूँद
तुम हो
आती जाती लहर भी तुम हो
कई - कई बार तुम समुद्र से
मिल चुके हो
फिर भी तुम्हारी समुद्र से
मिलने की चाहत में तुम ही हो
उठते – गिरते तुफानो में भी
तुम ही हो l
बादलो में मचलती हर बूद में
तुम हो
धरती से मिलने को आतुर भी तुम
हो
विद्युत की ज्वाला भी तुम
हो
आती - जाती सांसो के बीच भी
तुम हो
चंचल में स्थिर तुम हो
स्थिर में चंचल भी तुम हो
कुछ नहीं में सब कुछ और सब
कुछ में कुछ नहीं
तुम हो !
जीवन में मृत और मृत में
जीवन तुम हो
तुम निशब्द हो तुम इशारा हो
l
सूक्ष्म में तुम हो और
विराट भी तुम हो
तुम जहाँ भी देख सकते हो हर
जगह तुम हो
भीतर जो देख रहा है वह तुम
हो
बाहर जो दिख रहा है वह भी तुम
हो
भीतर जो सुन रहा है वह तुम
हो
जो सुनाई दे रहा है वह भी तुम
हो
तुम तुमसे ही मिलना चाहते
हो
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