मिट्टी एक त्यौहार है, एकदम रोपड़ी जैसी, जिसमे मिट्टी महकती है, संगीत के साथ इसमे मनुष्यों की धरती पर अभी तक की यात्रा का पूरा विवरण जिंदा है । इसी मिट्टी में लतपत है इतिहास मानव का, जीव -जन्तुओं का, रंग बिरंगी तितलियों का, पेड़ -पौधों का 'मिट्टी इतिहास है'; वहाँ वर्तमान भविष्य चुप-चाप खेत की मेड़ पर एक अहंकारी आसमानी बिजली की तरह चमचमाता साफ सुथरा खड़ा है, मानो कि वह रोटी, दाल- भात सब्जी सब आसमान से प्राप्त करता हो और मिट्टी पर उसकी निर्भरता खत्म हो गई हो, उसने अपनी नाक सिकोड़ी है, भौ उचकाई है । *भविष्य मिट्टी है* इसे आप सभ्य शब्दों में महोत्सव कह सकते हो मिट्टी का मिट्टी के साथ । जिसे कभी-कभी जीवन भी कहते हैं।
Karan singh
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