अदाएं
अदाएं ऐसी कि तुम्हारा शर्माना अमर हो
गया
मालूम नहीं कब हमसे जुर्म हो
गया
ये अर्जियां, अदालत, दलील
और कैद सब कबूल है
बस एक बार मुड़कर तुम्हारा मुस्कराना ग़जब हो गया
।
तुम तो कहती थी कि तुम्हारी बाहों में
जन्नत है
तो अब क्या कैदखाने को भी इश्क की
इबादत गाह
बनाकर मानोगी ।
हकीकत तो हम जानते है आपकी आँखों की
तुम्हारी निगाहों ने कितनी बार कत्ल
किया है मेरा
चश्मदीद भी तुम ही हो
मै गवाह कहाँ से लेकर आऊं
अब हम अदालत को क्या बताएं
कैसे बिना हथियारों के
तुम हर रोज कत्ल कर देती हो मासूमों का
हर वक्त तुम्हारा जुर्म कोई और कबूल कर
लेता है
तुम्हारी आंखों में दरिया है सच में
मेरा डूबना पक्का है कस्ती समेत
हम से बेहतर कोन जानता है
डुबाना तुम्हारा हुनर है
तुम्हारे इस हुनर को मेरा सलाम !
मै आज भी तुम्हारी खुशबू
बहुत दूर से पहचान लेता हूं
मै कई मर्तबा इत्र लेने बाज़ार जरूर गया
लेकिन खाली हाथ लौट आया
मेरे तहखाने में आज भी कैद है
तुम्हारा तकिया, रुमाल बैग और कुछ सामान
कभी आओ फुरसत में वही पर
हम चलते फिरते नज़र जरूर आ रहे है
तुमको
लेकिन सच है कि हम ठहरे है वही पर
जहां तुम छोड़ कर चले गए थे
अब जंग होती है तो हो जाने दो
अब लड़ाके हर तरफ हमारे है।
हथियार भी हमारे है ।
इस बार पक्का बंदोबस्त करके आना
गैरजरूरी सामान छोड़ देना
मुझे यकीन है कि आज तुमको भी अदालत में
आजीवन
कैद की सजा मुकर्रर की जाएगी
Karan
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