समय का अंत
भोर होगी, ऊँजियारा होगा
हवा भी चलेगी, आज बच्चे भी जरूर खेलेंगे
लड़ेंगे झगड़ेंगे
फिर एक बार सब जोर से हँसेंगे
तुम वही होंगे
समय का अंत होगा
आज फिर बारिश होगी
बारिश की बुँदे तुम पर पड़ेगी
तुम आसमान में देखोगे
फिर कोई आवाज आएगी
क्या कर रहे हो
बारिश में मत खेलो
भीग जाओगे
अचानक समय जी उठेगा
फिर सब कुछ होगा तुम नहीं होंगे
कुछ देर बाद
गीली मिट्टी को छूने का मन करेगा
मिट्टी में खेलना जी उठेगा
फिर कोई आवाज आएगी
क्या बच्चों की तरह खेलते हो
समय फिर जी उठेगा
तुम्हे पुरानी यादे आएँगी
तुम यादो में खो जाओगे
कुछ देर बाद तुम चल पड़ोगे
चलते रहोगे बहुत लोगों के साथ
अकेले में डर लगेगा
तुम अँधेरे से डरने का बहाना बनाओगे
कभी – कभी तुम अकेले रहना पसंद करोगे
अब क्या
अकेले में फिर आपको दोस्तों की याद आएगी
फिर तुम लोगों के पास आओगे
कभी कभी तुम अपने आप को समझाओगे
कि तुम ठीक चल रहे हो
सब लोग भी यही कर रहे है
कभी अचानक तुम रुक जाओगे
फूलो के पास
फिर बारिश होगी
बुँदे तुम पर गिरेंगी
अब तुम डर जाओगे बूंदों से
भीगने से
फिर तुम बारिश से बचोगे
कही छत ढूँडोगे
तुम घर के अन्दर बैठ जाओगे
दुबक कर
फिर तुम खिड़की से बाहर देखोगे
अरे ये क्या
कुछ लोग बारिश में भीग रहे होंगे
मुस्करा रहे होंगे
तुम उनको देखकर हँसोगे
कुछ देर बाद
आप खिड़की से हाथ बाहर निकालोगे
बूंदे तुम पर पड़ेंगी
अब समय का अंत होगा
या अंतिम समय होगा
हवा भी चलेगी
फिर बारिश होगी......
Karan singh 13
May 2018
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