दीदार
पाओं में पायल की खनक ही
नहीं
जीता जागता गुलिस्ताँ देखो
नज़रों की नजर देखो
अपनी ही भीतर देखो l
जब रास्ते बदलकर भी वही आना
है
तो मंजिलों की मंजिल भी मत
देखो
हर बार इस तरह देखो
कि देखना ही हो जाओं
हाथों से देखों
माथे से देखों
जहाँ देख रहे हो वहाँ
अपने आप को भी देखो l
आसमान में देखों
बादलों के पार l
ऐसे सुनो कि सुनना ही हो
जाओ l
ऐसे देखो कि देखना ही हो
जाओ l
आँखों का क्या वास्ता है
देखने से
एक बार आँखे बन्द करके देखो
l
Karan Singh 16 Oct 2017
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